जून माह के दौरान असम राज्य में आई भयंकर बाढ़ ने यहाँ आपात स्थिति को उत्पन्न कर दिया था। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुल 33 जिलों में से 31 जिले बाढ़ की चपेट में थे। हालांकि बाढ़ की स्थिति में अब कुछ सुधार हुआ लेकिन राज्य के पांच जिलों में बाढ़ से अब भी 2.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।
बाढ़ के प्राकृतिक कारण
जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक तापन
विशेषज्ञों के अनुसार असम में बाढ़ आने के कई कारण हैं जिसमें असाधारण रूप से तीव्र मानसून पूर्व वर्षा एक प्रमुख कारण है। आमतौर पर असम में 1 मार्च से 20 मई के दौरान औसत वर्षा 434.5 मिमी. होती है, जबकि इस वर्ष औसत वर्षा 719 मिमी. हुई है। पर्यावरणविदों के अनुसार जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक तापन ने मानसून के आगमन एवं वापस लौटने के समय के साथ साथ वर्षा प्रतिरूप को भी प्रभावित किया है।
असम में मानसूनी वर्षा
असम दक्षिण-पश्चिम मानसून से सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाले राज्यों में से एक है इसलिए अधिक मात्रा में मानसूनी वर्षा के कारण बह्मपुत्र नदी में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है।
ब्रह्मपुत्र नदी का अपवाह क्षेत्र एवं तलछट ब्रह्मपुत्र नदी का अपवाह तंत्र चार देशों चीन, भारत, बांग्लादेश और भूटान के मध्य लगभग 5,80,000 वर्ग किमी. में विस्तृत है।
यह नदी 19,830 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड (क्यूमेक) जल प्रवाह के साथ वैश्विक स्तर पर अमेज़ॅन (99,150 क्यूमेक), कांगो (39,660 क्यूमेक) और यांग्त्ज़ी (21,800 क्यूमेक) नदियों के बाद चौथे स्थान पर है।
ब्रह्मपुत्र अपने उद्गम क्षेत्र तिब्बत से बड़ी मात्रा में तलछट लाती है और जैसे ही यह असम के समतल मैदान में आती है, इसका वेग कम हो जाता है और नदी तलछट को निक्षेपित कर देती है। इस तलछट जमाव से नदी का प्रवाह बाधित होता है जो बाढ़ का कारण बनता है।
भूकंप-प्रवण प्रकृति
असम भूंकप प्रभावित क्षेत्र आता है जिसके कारण यहाँ नदियों की स्थिरता और बहाव प्रभावित होती है और कभी कभी बाढ़ का कारण बनती है।
ध्यातव्य है कि वर्ष 1950 के विनाशकारी भूकंप के बाद असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी का जल स्तर अचानक दो मीटर बढ़ गया था।
बाढ़ के मानवनिर्मित कारण
प्राकृतिक कारकों के अलावा मानव निर्मित कारकों में नदी के बहाव क्षेत्र में आवासों का निर्माण, अवैध निर्माण गतिविधियाँ, वनों की कटाई, अवैध खनन आदि शामिल हैं।
बाढ़ के प्रभाव
बाढ़ का प्रभाव बहुत व्यापक स्तर पर पड़ता है, सबसे पहले लोग अपनी भूमि से वंचित हो जाते हैं, उसके बाद फसल, आवास, घर के सामान, पशुधन इत्यादि महत्वपूर्ण संपत्ति भी खो देते हैं।
भूमिहीनता की स्थिति उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर बनाती है, जिससे प्रभावित लोग पलायन को मजबूर होते हैं।
विस्थापित परिवार अवैध रूप से जमीनों पर ‘अतिक्रमण’ करते हैं। असम में गैर-दस्तावेज प्रवासन एक बुनियादी समस्या रही है, जिसका एक मुख्य कारण बाढ़ है।
बाढ़ के कारण जलजनित बीमारियों एवं स्वास्थ्य से संबंधित अनेकों समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण प्रशासनिक चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
बाढ़ के कारण जनजीवन के साथ-साथ पशुओं का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है, वनों में रहने वाले अनेकों जीव-जंतुओं पर खाद्य संकट आ जाता है जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर इन जानवरों की मृत्यु हो जाती है।
इसके अलावा महत्त्वपूर्ण भूमि एवं कृषि क्षेत्रों की अपार हानि होती है। विदित है कि दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली ने पिछले 50 वर्षों में बाढ़ के कारण कटाव से अपना लगभग आधा क्षेत्र खो दिया है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए प्रयास
बाढ़ एक प्राकृतिक घटना है जिसकी सामान्यतः एक निश्चित समयावधि होती है असम के मामले में यह मानसून के दौरान होता है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए बांधों के निर्माण का सुझाव भी दिया जाता है लेकिन यह ऐसी जगहों पर कारगर होता है जहाँ वर्षा की मात्रा बहुत अधिक न हो, क्योंकि बांधों में जल को धारण करने की एक क्षमता होती है।
यही कारण है कि ब्रह्मपुत्र बेसिन में स्थानीय लोगों और कई पर्यावरणविदों ने बांध निर्माण योजनाओं का विरोध किया है।
विदित है कि ब्रह्मपुत्र बोर्ड ने 1982 में अपने ब्रह्मपुत्र नदी मास्टर प्लान में बाढ़ की रोकथाम के लिए बांध और जलाशय बनाने का सुझाव दिया था।
बाढ़ को रोकने के लिए नदी पर तटबंध को अल्पकालिक उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, ड्रेजिंग द्वारा नदी के तल की खुदाई और नदी को गहरा बनाया जा सकता, ताकि नदी के जल ग्रहण करने की क्षमता में वृद्धि हो सकें।
आगे की राह
असम की बाढ़ के एक स्थायी समाधान के रूप में “एकीकृत बेसिन प्रबंधन” प्रणाली महत्त्वपूर्ण है जो ब्रह्मपुत्र नदी के बेसिन साझा करने वाले देशों को एक मंच पर आने के लिए प्रेरित करती है।
विदित है कि इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय संबंध के साथ साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सरकारों की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित मैदानों (Flood-Plain) में आर्थिक गतिविधियों जैसे कृषि कार्य, गृह निर्माण एवं अन्य निर्माण कार्यों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिये।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
क्या कारण है कि असम परम्परागत रूप से एक बाढ़ प्रवण क्षेत्र है? ब्रह्मपुत्र अपवाह क्षेत्र में बाढ़ आपदा से निपटने के लिए प्रभावी सुझावों को प्रस्तुत कीजिए।