हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन वर्षीय “क्रिटिकल मिनरल्स इन्वेस्टमेंट पार्टनरशिप” में $ 5.8 मिलियन की राशि प्रदान करने की प्रतिबद्धता प्रकट की है।
क्रिटिकल मिनरल्स ऐसे तत्व हैं जो रोजमर्रा में उपयोग आने वाली प्रौद्योगिकियों के लिये बुनियादी घटक हैं।
इन खनिजों में मुख्यतः ग्रेफाइट, लिथियम और कोबाल्ट शामिल हैं। इनका उपयोग मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और हरित प्रौद्योगिकी जैसे सौर पैनल में किया जाता है।
इसके अतिरिक्त एयरोस्पेस, संचार और रक्षा उद्योग भी इन खनिजों पर निर्भर हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू जेट, ड्रोन, रेडियो सेट और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण में किया जाता है।
चीन 16 क्रिटिकल मिनरल्स का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों के वैश्विक उत्पादन में क्रमशः 70% और 60% की भागीदारी रखता है।
