हाल ही में, तमिलनाडु के कृष्णागिरी ज़िले में मयिलाडुम्पराई पुरातात्त्विक स्थल से लोहे के उपयोग के 4,200 वर्ष पहले के अर्थात् लगभग 2200 ईसा पूर्व के साक्ष्य पाए गए हैं। वर्तमान में यह लोहे का उपयोग करने वाला भारत में प्राचीनतम स्थल है…
यह लघुपाषाण काल (30,000 ईसा पूर्व) और प्रारंभिक ऐतिहासिक (600 ईसा पूर्व) युग के मध्य का एक महत्त्वपूर्ण स्थल है। इसकी खोज प्रोफेसर राजन ने 1990 के दशक में की थी।
इस स्थल के 10 किमी. के दायरे में कई अन्य पुरातात्त्विक स्थल जैसे- तोगरापल्ली, गंगावरम, संदूर, वेदारथट्टक्कल, गुट्टूर, गिदलुर, कप्पलवाड़ी भी अवस्थित हैं।
इस नवीनतम खोज से पहले, तमिलनाडु में लोहे के उपयोग का प्राचीनतम साक्ष्य मेट्टूर के पास थेलुंगनूर और मंगडु से प्राप्त हुआ था, जो 1500 ईसा पूर्व का है जबकि भारत में लोहे के उपयोग का प्राचीनतम प्रमाण 1900-2000 ईसा पूर्व का माना जाता था।
ध्यातव्य है कि सिंधु घाटी में लोहे का उपयोग नहीं किया गया है। जब लोहे की तकनीक का आविष्कार हुआ, तो इसने कृषि उपकरणों और हथियारों का उत्पादन में योगदान दिया जिससे आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति को बल मिला।