पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि नर्मदा नदी में अवैध खनन के कारण भारतीय टेंट कछुआ विलुप्त होने के कगार पर है…

यह भारत, नेपाल और बांग्लादेश की स्थानिक प्रजाति है, जिसका वैज्ञानिक नाम पंगशुरा टेंटोरिया (Pangshura Tentoria) है। इसकी तीन उप-प्रजातियां पी. टी. टेंटोरिया, पी. टी. सर्कमडाटा और पी. टी. फ्लेविवेंटर  (P. t. tentoria, P. t. circumdata and P. t. flaviventer) हैं।

पी. टी. टेंटोरिया, मुख्यतः प्रायद्वीपीय भारत, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम और मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं। पी. टी. सर्कमडाटा गंगा की पश्चिमी सहायक नदियों और गुजरात की नदियों में पाए जाते हैं।

पी. टी. फ्लेविवेंटर गंगा की उत्तरी सहायक नदियों में निवास करते हैं और उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं असम में पाए जाते हैं।

ये नदी के किनारे स्थिर जल और नदी के किनारे धीमी गति से बहते पानी के स्रोत में निवास करते हैं। ये मुख्य रूप से शाकाहारी होते हैं। आकर्षक प्रजाति होने के कारण इनका पालतू बाजार में अवैध कारोबार किया जाता है।

संरक्षण की स्थिति:

o  वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972:  सूची I

o  आई.यू.सी.एन.: कम चिंताजनक (Least Concern)

o  सी.आई.टी.ई.एस.: परिशिष्ट II

By QuizHat

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