भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने हाल ही में डेयरी उत्पाद से अगली पीढ़ी के प्रोबायोटिक जीवाणु लैक्टोबैसिलस प्लांटेरम जेबीसी5 (Lactobacillus Plantarum JBC5) की पहचान की है, जो वृद्धावस्था में बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने में सहायक हो सकता है।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी), गुवाहाटी के वैज्ञानिकों की टीम ने नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. एली मेटचनिकॉफ के सुझाव पर किण्वित डेयरी उत्पादों से स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने के लिए इस बैक्टीरिया की खोज की है।
यह बैक्टीरिया अनुसंधान के दौरान काईनोर्हेब्डीटीज एलिगेंस नामक एक सूत्रकृमि के स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हुआ है।
इस अनुसंधान में मॉडल जीव काईनोर्हेब्डीटीज एलिगेंस के जीवन काल में 27.81 प्रतिशत की वृद्धि के साथ, रोगजनक संक्रमणों के खिलाफ बेहतर प्रतिरक्षा, आंत शुद्धता और ऑक्सीडेटिव तनाव सहनशीलता में सुधार हुआ है।
वैज्ञानिकों ने इस प्रोबायोटिक जीवाणु का उपयोग कर दही भी विकसित की है जिसका सेवन स्वास्थ्य लाभों को प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। इस उत्पाद के लिए एक पेटेंट भी दायर किया गया है।
विदित है कि संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक हर ग्यारह में से एक व्यक्ति 65 वर्ष से अधिक उम्र का होगा। बुढ़ापा आमतौर पर उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के उच्च जोखिम से जुड़ा होता है, जैसे मोटापा, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग (पार्किंसंस, अल्जाइमर), हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, ऑटोइम्यून रोग और सूजन आंत्र रोग आदि।
