हाल ही में, मेन विश्वविद्यालय (University of Maine) के नेतृत्व में किये गए एक शोध में साउथ कोल ग्लेशियर के पिघलने की दर सतह पर बनने वाली बर्फ की तुलना में 80 गुना तेज बताई गई है।
यह ग्लेशियर विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट के निकट सर्वाधिक ऊँचाई पर अवस्थित है, जो समुद्र तल से लगभग 7,906 मीटर ऊपर है।
रिपोर्ट के अनुसार, बर्फ के पिघलने की दर प्रति वर्ष लगभग 2 मीटर के करीब है, जिसके कारण यह ग्लेशियर इस सदी के मध्य तक गायब हो सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार 1990 के दशक के उत्तरार्ध से ग्लेशियर पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सबसे तीव्र रहा है।
सूक्ष्म रेडियोकार्बन डेटिंग से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार इस ग्लेशियर में जमी बर्फ की उम्र लगभग 2000 वर्ष है।
विदित है कि माउंट एवरेस्ट को नेपाल में सागरमाथा के नाम से जाना जाता है जबकि चीन में इसे माउंट कोमोलंगमा कहा जाता है, जो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी का तिब्बती नाम है।
