चर्चा में क्यों: अंतर्राष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस (2 फरवरी) के अवसर पर भारत की दो आर्द्रभूमियों- खिजड़िया पक्षी अभयारण्य (गुजरात) और बखिरा वन्यजीव अभयारण्य (उत्तर प्रदेश) को रामसर स्थलों में शामिल किया गया है। वर्तमान में भारत में कुल रामसर स्थलों की संख्या 49 हो गई है, जो दक्षिण एशिया में सर्वाधिक है।
रामसर संधि क्या है?
आर्द्रभूमियों से संबंधित इस संधि (Ramsar Convention on Wetlands) पर 2 फरवरी, 1971 को ईरान के रामसर में हस्ताक्षर किये गए थे। “आर्द्रभूमि पर यूनेस्को के 1971, अभिसमय” के अनुसार रामसर स्थल अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि हैं। यह संधि 1975 में लागू हुई, जबकि भारत ने इस पर 1982 में हस्ताक्षर किया था।
यह एक अंतर-सरकारी संधि है जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और उसके समुचित उपयोग के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह जैव विविधता के संरक्षण एवं उनके पारिस्थितिक तंत्र के रखरखाव के जरिये मानव जीवन हेतु बेहतर पर्यावरण के निर्माण में सहयोगी है।
इस संधि के तहत निर्धारित नौ मानदंडों में से कम से कम एक मानदंड को पूरा किये जाने पर किसी आर्द्रभूमि को इस सूची में शामिल किया जाता है।
आर्द्रभूमि के लाभ:
आर्द्रभूमियां बाढ़ नियंत्रण, जलवायु विनियमन और अनेक जीव जन्तुओं के लिए आवास जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करती हैं।
ये वर्षा जल के द्वारा भूजल को रिचार्ज करके धरती पर मीठे पानी की आपूर्ति बनाये रखने के लिए पर्यावरण के सबसे आवश्यक घटक है।
