देश भर में दृष्टिबाधित छात्रों तक डिजिटल एम्बॉसिंग तकनीक का उपयोग करके बनाए गए ब्रेल मानचित्रों की पहुँच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी का भारत में पहली बार विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्य कर रहे नेशनल एटलस एंड थीमैटिक मैपिंग ऑर्गनाइजेशन (एनएटीएमओ) द्वारा डिजाइन और कार्यान्वयन किया गया है।
डिजिटल एम्बॉसिंग (उभरे अक्षर) तकनीक एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसमें प्रिंटिंग प्लेट, मोल्ड, रसायन और सॉल्वेंट्स की जरूरत नहीं होती है। साथ ही, इसमें कोई प्रदूषक या अपशिष्ट नहीं निकलता है और ऊर्जा के कुल उपयोग में भी कमी आती है।
मुख्य रूप से विषयगत मानचित्र जीआईएस प्रौद्योगिकी का उपयोग करके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तैयार किए जाते हैं। जिसमें 3डी अक्षर उभारने के लिए एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है।
इससे पूर्व की प्रौद्योगिकी से तैयार किए गए मानचित्रों में बहुत ही कम समय में उनकी पठनीयता और महसूस करने की शक्ति समाप्त हो जाती थी।
