भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (Indian Human Spaceflight Programme) का उद्देश्य अंतरिक्ष में भारतीय मानव उपस्थिति को बढ़ाना है, जिसकी शुरुआत पृथ्वी की निम्न कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में मानव मिशनों से की जा रही है और 2040 तक एक भारतीय मानवयुक्त चंद्रमा पर उतरने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ा जा रहा है। इस दिशा में, मानव अंतरिक्ष मिशनों से जुड़ी शारीरिक, मानसिक और संचालन संबंधी चुनौतियों को समझने के लिए भारतीय विषय डेटा का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए, ज़मीन आधारित “एनालॉग मिशन” — जो मानव अंतरिक्ष मिशन के कुछ पहलुओं का अनुकरण करते हैं — मानव स्वास्थ्य और प्रदर्शन जोखिमों को समझने का एक प्रभावी माध्यम बनते हैं।

इस प्रयास का नेतृत्व इसरो का ‘ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर (HSFC)’ कर रहा है।
HSFC ने नवंबर 2024 में ‘लद्दाख ह्यूमन एनालॉग मिशन (LHAM)’ का संचालन किया और हाल ही में जुलाई 2025 में संपन्न हुए 10-दिवसीय पृथक अध्ययन ‘अनुगामी’ में भाग लिया, जिसमें गगनयान के यात्री भी शामिल रहे।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 31 जुलाई 2025 को डॉ. वी. नारायणन, सचिव, अंतरिक्ष विभाग एवं इसरो अध्यक्ष ने ‘हिमालयन आउटपोस्ट फॉर प्लैनेटरी एक्सप्लोरेशन (HOPE)’ नामक एनालॉग मिशन की स्थापना का उद्घाटन त्सो कर घाटी, लद्दाख में किया।

🔭 डॉ. वी. नारायणन ने उद्घाटन भाषण में कहा:

“यह एनालॉग मिशन केवल एक सिमुलेशन नहीं, बल्कि भविष्य की एक संपूर्ण रिहर्सल है।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विजन के अनुरूप, अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्योगों के लिए खोला गया है। यह मिशन एक उद्योग भागीदार के सहयोग से संचालित हो रहा है, जो भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में उभरते हुए सार्वजनिक-निजी साझेदारी (Public-Private Synergy) का उदाहरण है।

🚀 HOPE एनालॉग मिशन की प्रमुख विशेषताएँ:

  • 1 से 10 अगस्त, 2025 तक 10-दिवसीय मिशन, जिसे एक निजी उद्योग भागीदार द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
  • इसमें IIST व RGCB तिरुवनंतपुरम, IIT हैदराबाद, IIT बॉम्बे और इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन, बेंगलुरु जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की प्रयोगात्मक भागीदारी है।
  • वैज्ञानिक इस मिशन के दौरान एपिजेनेटिक, जीनोमिक, शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करेंगे।
  • साथ ही, स्वास्थ्य निगरानी प्रोटोकॉल, ग्रहों की सतह पर संचालन, नमूना संग्रहण, और सूक्ष्मजीव विश्लेषण तकनीकों को भी जांचा और परखा जाएगा।

🛰️ HOPE एनालॉग सेटअप:

  • 8 मीटर व्यास का क्रू हबीटैट मॉड्यूल, जिसमें मिशन क्रू का निवास होगा।
  • 5 मीटर व्यास का यूटिलिटी मॉड्यूल, जिसमें संचालन और सपोर्ट सिस्टम रहेंगे।
  • दोनों मॉड्यूल आपस में जुड़े हुए हैं ताकि कामकाज का प्रवाह अविरल बना रहे।

🌌 त्सो कर घाटी का चयन क्यों?

  • यह क्षेत्र प्रारंभिक मंगल ग्रह के वातावरण से काफी मिलता-जुलता है, जैसे:
    • उच्च यूवी विकिरण
    • कम वायुदाब
    • अत्यधिक ठंड
    • खारा परमा-फ्रॉस्ट मिट्टी

📊 इसरो के भविष्य के लिए महत्व:

इन एनालॉग मिशनों से प्राप्त अमूल्य डेटा इसरो की भावी मानव अन्वेषण योजनाओं के लिए तकनीकी प्रदर्शन, क्रू कार्यप्रणाली और पर्यावरण अनुकूलन को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। यही डेटा आगामी भारतीय मानव मिशनों की संरचना और संचालन प्रोटोकॉल का आधार बनेगा।

By QuizHat

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