exploded house in borodyankaPhoto by Алесь Усцінаў on <a href="https://www.pexels.com/photo/exploded-house-in-borodyanka-11734710/" rel="nofollow">Pexels.com</a>

ब्रिटेन स्थित गैर सरकारी संगठन एक्शन ऑन आर्म्ड वायलेंस (एओएवी) द्वारा गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में विस्फोटक हथियारों से नागरिकों को नुकसान

  • दर्ज हताहत: 2024 में 9,553 विस्फोटक हिंसा की घटनाओं में 67,026 मौतें व घायल, जो 2010 के बाद सबसे ज्यादा हैं।
  • आम नागरिकों पर प्रभाव: 89% (59,524) हताहत नागरिक, जो 2023 की तुलना में 69% अधिक। 95% घटनाएँ आबादी वाले इलाकों (शहर, शरणार्थी शिविर) में हुईं।
  • सबसे घातक संघर्ष क्षेत्र:
    • गाजा: 23,432 नागरिक हताहत (वैश्विक मौतों का 59%), मुख्यतः इजरायली सैन्य कार्रवाइयों के कारण।
    • यूक्रेन: 11,765 नागरिक हताहत (वैश्विक का 20%), रूसी हमलों के कारण।
    • लेबनान: 9,100 नागरिक हताहत—2023 की तुलना में 6,354% की भयावह वृद्धि, इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष के चलते।
    • सूडान व म्यांमार: गृहयुद्ध और सैन्य कार्रवाइयों में तेजी से बढ़ोतरी।
  • प्रयुक्त हथियार:
    • हवाई हमले (एयरस्ट्राइक, मिसाइल): 54% नागरिक हताहत।
    • जमीनी हथियार (तोपखाने, रॉकेट): 22%।
    • आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड विस्फोटक यंत्र): 10%, जिसमें राज्य-प्रायोजित हमले (जैसे इजरायल द्वारा लेबनान में रेडियो डिवाइस विस्फोट) शामिल।
  • विशेष रूप से प्रभावित समूह: कम से कम 3,089 बच्चे व 2,932 महिलाएँ मारे/घायल—2017 के बाद सबसे ज्यादा।

  1. घटनाएँ व हताहत:
    • 2024 में 88 दर्ज घटनाएँ, जो भारत को सर्वाधिक प्रभावित 15 देशों में शामिल करती हैं।
    • हताहत आँकड़े स्पष्ट नहीं, पर संघर्ष क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित इलाके) में नागरिक व सशस्त्र समूह प्रभावित।
  2. प्रमुख अपराधी समूह:
    • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी): वैश्विक गैर-राज्य हिंसा की 4% घटनाओं के लिए जिम्मेदार, ग्रामीण/वन क्षेत्रों में आईईडी का प्रयोग।
    • अन्य समूह (जैसे पूर्वोत्तर विद्रोही) भी लैंडमाइन जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल करते हैं।
  3. क्षेत्रीय प्रभाव:
    • पाकिस्तान (नागरिक हताहत में 7वें स्थान पर): बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले भारतीय सीमा के नजदीक भी होते हैं।
    • म्यांमार का गृहयुद्ध (5वें स्थान पर): पूर्वोत्तर भारत में शरणार्थियों का आना व सीमा पार हिंसा का खतरा।
  4. चुनौतियाँ:
    • अपर्याप्त आँकड़े: छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर जैसे दुर्गम इलाकों में हताहतों की सही संख्या दर्ज नहीं हो पाती।
    • बच्चे व महिलाएँ: वैश्विक रुझान के अनुसार, इन पर असमान प्रभाव की आशंका।

अनुशंसाएँ

  • सभी देशों के लिए:
    • आबादी वाले इलाकों में विस्फोटक हथियारों का प्रयोग रोकें व 2022 के राजनीतिक घोषणापत्र का समर्थन करें।
    • पारदर्शिता बढ़ाएँ (हताहतों की उम्र/लिंग के अनुसार रिपोर्टिंग)।
  • भारत के लिए विशेष:
    • संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में लैंडमाइन सफाई अभियान तेज करें
    • विस्फोटक हिंसा के आँकड़ों का बेहतर संग्रह सुनिश्चित करें।
    • सीमा पार समन्वय मजबूत कर क्षेत्रीय हिंसा के प्रभाव को कम करें।

By QuizHat

हिंदी माध्यम के लिए समर्पित

Leave a Reply

Discover more from FOR UPSC & STATE PSC...

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading