भारत ने महासागरों में जैव विविधता के संरक्षण और सुरक्षा के लिए एक वैश्विक समझौते, हाई सीज ट्रीटी (High Seas Treaty) पर हस्ताक्षर और अनुसमर्थन करने का निर्णय लिया है, जिसकी पहुँच और प्रभाव की तुलना अक्सर 2015 के पेरिस समझौते से की जाती है।
हाई सीज संधि, जिसे राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे जैव विविधता पर समझौते (agreement on Biodiversity Beyond National Jurisdictions : BBNJ) के रूप में भी जाना जाता है।
हाई सीज क्षेत्र में संचालित की जाने वाली गतिविधियाँ अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कानूनों द्वारा शासित होते हैं। कानूनों में सबसे उल्लेखनीय है- संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन, या UNCLOS।
एक बार जब हाई सीज ट्रीटी को अपेक्षित संख्या में देशों द्वारा अनुमोदित कर दिया जाएगा और यह अंतर्राष्ट्रीय कानून बन जाएगा, तब यह UNCLOS ढांचे के तहत काम करेगा।
कम से कम 60 देशों द्वारा अपने औपचारिक अनुसमर्थन दस्तावेज प्रस्तुत करने के 120 दिन बाद यह संधि अंतरराष्ट्रीय कानून बन जाएगी। अब तक 91 देशों ने संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन उनमें से केवल 8 ने ही अनुसमर्थन किया है।