संदर्भ
2 सितंबर, 2022 को स्वदेशी रूप से विकसित भारत के पहले विमानवाहक युद्धपोत ‘INS विक्रांत’ को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। इसके साथ ही भारत उन राष्ट्रों के समूह-अमेरिका, रूस, फ्रांस, यूके और चीन में शामिल हो गया है जो विमानवाहक पोत के डिजाइन और निर्माण में सक्षम हैं।
आईएनएस विक्रांत के बारे में
संस्कृत शब्द विक्रांत, जिसका अर्थ साहसी है, का उल्लेख भगवद् गीता सहित विभिन्न शास्त्रों में मिलता है। गीता के प्रथम अध्याय के छठे श्लोक में पांडवों की सेना के कुछ सेनापतियों के पराक्रम का वर्णन करते हुए ‘विक्रांत’ विशेषण का प्रयोग किया गया है।
विक्रांत भारत में अब तक बनाया गया सबसे बड़ा युद्धपोत है और भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित पहला विमानवाहक पोत है।
262 मीटर लंबे और 62 मीटर चौड़े आईएनएस विक्रांत का फ्लाइट डेक फुटबॉल के दो मैदानों से भी बड़ा है। यह पोत पूरी तरह से लोड होने पर लगभग 43,000 टन विस्थापित करता है, जो 28 समुद्री मील की अधिकतम गति के साथ 7,500 समुद्री मील यानि लगभग 14,000 किमी. की यात्रा कर सकता है।
आईएनएस विक्रांत पोत का निर्माण
इस विमानवाहक पोत के डिजाइन और निर्माण को जनवरी 2003 में मंजूरी दी गई थी। जलपोत निर्माण मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की निर्माण इकाई, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) को पोत बनाने का काम सौंपा गया।
इस विमानवाहक पोत के समुद्री परीक्षण के पहले चरण की शुरुआत पिछले वर्ष 4 अगस्त को की गई। इसके बाद क्रमश: अक्टूबर 2021 और इस वर्ष जनवरी में दूसरे और तीसरे चरण का समुद्री परीक्षण किया गया।
इन तीन चरणों में प्रणोदन मशीनरी, विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक सूट, डेक मशीनरी, जीवन रक्षक उपकरण, जहाज के नेविगेशन और संचार प्रणालियों का परीक्षण किया गया।
समुद्री परीक्षणों का चौथा और अंतिम चरण 10 जुलाई को पूरा किया गया, जिसमें कुछ एविएशन फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स उपकरण सहित अधिकांश उपकरणों और प्रणालियों का एकीकृत परीक्षण किया गया था। इसके पश्चात् इसे 28 जुलाई को नौसेना को सौंप दिया गया।
आईएनएस विक्रांत जहाज पर सुविधाएं और उपकरण
इस पोत को लगभग 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। नौसेना के अनुसार, इसमें लगभग 80% स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण कार्य में 2,000 कर्मियों को रोजगार दिया गया, जबकि 13,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।
18 मंजिल ऊंचे जहाज में महिला अधिकारियों और नाविकों को समायोजित करने के लिए विशेष केबिन हैं। एविएशन हैंगर दो ओलंपिक आकार के पूल जितना बड़ा है जिसमें लगभग 20 विमान रखें जा सकते हैं।
अपने पूरी तरह से परिचालन मोड में, इसके पास 30 विमान शामिल होंगे जिसमें मिग-29K लड़ाकू जेट, एयरबोर्न प्रारंभिक चेतावनी नियंत्रण हेलीकॉप्टर, कामोव-31 हेलीकॉप्टर, एमएच -60 आर आदि शामिल हैं।
यह पोत लड़ाकू विमान को लॉन्च करने के लिए स्की-जंप के साथ शॉर्ट टेक ऑफ बट अरेस्ट रिकवरी (STOBAR) मॉडल का उपयोग करता है। इस जहाज पर उनकी रिकवरी के लिए तीन अरेस्टर वायर का एक सेट है।
भारतीय नौसेना आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत के अलावा तीसरे विमानवाहक पोत के लिए भी प्रयासरत है। लगभग 65,000 टन के प्रस्तावित विस्थापन वाले इस पोत का नाम आईएनएस विशाल रखा जाएगा।
आईएनएस विक्रांत की चुनौतियां
विमानवाहक के निर्माण और संचालन के संबंध में लागत हमेशा एक महत्वपूर्ण कारक होता है। इसके परिचालन में विध्वंसक, फ्रिगेट, पनडुब्बी और वायुयान शामिल होते हैं। अपने स्वयं के रक्षा प्रणालियों के सुरक्षात्मक आवरण के बावजूद विमानवाहक एक सुभेद्य लक्ष्य होते हैं।
निष्कर्ष
विमानवाहक पोत महासागरों के बीच में भारत का एक संप्रभु क्षेत्र होगा, जो तैरते हुए एयरबेस के रूप में कार्य करेगा। ये पोत किसी भी राष्ट्र के लिए सबसे शक्तिशाली समुद्री संपत्तियों में से एक होते हैं, जो हवाई वर्चस्व के लिए अपने घरेलू तटों से दूर यात्रा करने की नौसेना की क्षमता को बढ़ाते हैं।