दुनिया का सबसे शक्तिशाली पार्टिकल कोलाइडर, लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC), मूलभूत कणों के अध्ययन के लिये पुनः शुरू किया गया है।
विदित है कि पहली बार इस कोलाइडर को 10 सितंबर, 2008 को शुरू किया गया था। रखरखाव और उन्नयन के लिए यह मशीन पिछले तीन वर्षों से बंद थी।
सर्न (CERN) द्वारा विकसित यह एक कण त्वरक है जो स्विट्जर्लैंड-फ़्रांस की सीमा पर जमीन के 100 मीटर नीचे स्थापित किया गया है।
एल.एच.सी. में कणों की ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट की 27 किलोमीटर लंबी ट्रैक-लूप संरचना है जो ट्रैक के अंदर प्रोटॉनों को विपरीत दिशाओं में लगभग प्रकाश की गति का वेग प्रदान करती है।
यह मशीन अपने महत्वपूर्ण घटकों को शून्य से 271.3 डिग्री सेल्सियस कम तापमान पर अल्ट्राकोल्ड रखने के लिए तरल हीलियम का उपयोग करती है।
विदित है कि 4 जुलाई, 2012 को, सर्न के वैज्ञानिकों ने एल.एच.सी. के पहले रन के दौरान हिग्स बोसॉन या ‘गॉड पार्टिकल’ की खोज की घोषणा की थी।
इसके कारण पीटर हिग्स और उनके सहयोगी फ्रांस्वा एंगलर्ट को 2013 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
ऐसा माना जाता है कि हिग्स बोसोन और इससे संबंधित ऊर्जा ने ब्रह्मांड के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
