हाल ही में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को गुलाबी मीनाकारी के उत्पाद को उपहार में दिया।
गुलाबी मीनाकारी भारत के दुर्लभ शिल्पों में से एक है, जो वाराणसी में गाय घाट के निकट प्रचलित है।
यह फ़ारस की एक कला है, जिसमें धातुओं की सतह की विभिन्न रंगों से रंगाई की जाती है। यह कला 17वीं सदी के आरंभ में मुग़लकाल के दौरान वाराणसी में फ़ारसी तामचीनी बनाने वालों द्वारा लाई गई थी।
इस शिल्पकला में शुद्ध चांदी के एक टुकड़े को आधार रूप में ढाला जाता है, और एक चुने हुए डिजाइन को धातु में उकेरा जाता है। उभरा हुआ आकार फिर प्राकृतिक अनारदाना (अनार के बीज) गोंद के साथ मिश्रित मीना कांच के साथ बड़ी निपुणता से भरा जाता है।
मीनाकारी तीन लोकप्रिय रूपों में मिलती है – ‘एक रंग खुला मीना’ जिसमें एक पारदर्शी रंग का उपयोग होता है। ‘पांच रंगी मीना’ जिसमें लाल, सफेद, हरा, हल्का नीला एवं गहरा नीला रंग उपयोग में लाया जाता है। ‘गुलाबी मीनाकारी’ में गुलाबी रंग प्रमुख है इसके लिए वाराणसी बेहद लोकप्रिय है।
यह वाराणसी का एक जीआई-टैग कला-रूप है जिसका उपयोग सामान्यतः आभूषणों एवं घरेलू सजावटी सामान पर किया जाता है।