केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विमुक्त घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों (De-notified, Nomadic and Semi Nomadic Communities) के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ‘सीड’ योजना का शुभारंभ किया गया है…
- ऐतिहासिक रूप से इन समुदायों की निजी भूमि या घर के स्वामित्व तक पहुंच नहीं रही है। ये जनजातियां अपनी आजीविका और आवासीय उपयोग के लिए जंगलों और चराई की भूमियों का ही उपयोग करती हैं।
- 2021-22 से 2025-26 तक की 5 वर्षों की अवधि में 200 करोड़ रुपये के अनुमानित लागत के साथ सीड योजना (Scheme for Economic Empowerment of DNTs -SEED) में निम्नलिखित चार घटक होंगे…
- प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अच्छी गुणवत्ता की कोचिंग प्रदान करना
- स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना
- समुदाय स्तर पर आजीविका को सुगम बनाना
- मकान निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना
- विदित है कि इन समुदायों की राज्य-वार सूची तैयार करने तथा उचित उपाय सुझाने के लिए 2014 में भीकू रामजी इदाते की अध्यक्षता में एक आयोग गठित हुआ था।
- आयोग के सुझाव पर भारत सरकार द्वारा फरवरी 2019 में इन समुदायों के लिए विकास एवं कल्याण बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
