चर्चा में क्यों:हाल ही में, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की रेडलिस्ट में भारतीय उपमहाद्वीप पर पाई जाने वाली एक छोटी पक्षी की प्रजाति फिन्सवीवर या येलोवीवर को सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी से हटाकर संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
फिन्स वीवर भारत में पाई जाने वाली वीवर पक्षियों की चार प्रजातियों में से एक है, जो मुख्य रूप से उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तराई घास के मैदानों तथा असम के कुछ इलाकों में पाई जाती है।
यह पक्षी अपने विशिष्ट घोसलों के लिये जानी जाती है, जिसे ये सेमल के पेड़ों पर पर बनाती हैं। इस पक्षी की भारत में वर्तमान आबादी लगभग 500 ही शेष है।
आवास का विनाश फिन्स वीवर की संख्या में तेज गिरावट का कारण है। यह पक्षी कृषि और निर्माण कार्यों के कारण लगातारघटते घास के मैदानों की वजह से खतरे में है।
इस पक्षी को पहली बार भारत में 1866 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक एओह्यूम द्वारा खोजा गया था। वह एक पक्षी विज्ञानी और वनस्पतिशास्त्री भी थे।
इसके पश्चात् भारतीय पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने 1959 में कुमाऊं तराई में इस पक्षी को फिर से खोजा था।
