भारत का पहला लिक्विड-मिरर टेलीस्कोप, जो समुद्र तल से लगभग 2,450 मीटर की ऊंचाई पर उत्तराखंड में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के देवस्थल वेधशाला में स्थापित किया जा रहा है।
भारत, बेल्जियम, कनाडा, पोलैंड और उज्बेकिस्तान प्रमुख देश हैं जिन्होंने ILMT की स्थापना के लिए सहयोग किया है।
इस द्रव-दर्पण दूरबीन को खगोल विज्ञान अनुसंधान के लिए विकसित किया गया है जो दुनिया में कहीं भी संचालित होने वाला अपनी तरह का पहला टेलीस्कोप है।
इस दूरबीन में तरल के रूप में पारा भरा गया है जिसमें उच्च प्रकाश-परावर्तन क्षमता होती है। यह एक पतली परत के रूप में एक परवलयिक आकार की परावर्तक सतह (Paraboloid-shaped Reflecting Surface) बनाएगा जो दर्पण के रूप में कार्य करेगा। इस तरल दर्पण का व्यास 4 मीटर होगा।
विदित है कि तरल-दर्पण दूरबीन, एक स्थिर दूरबीन हैं जो अंतरिक्ष के एक निश्चित भाग पर नजर रखती हैं और उस भाग में सितारों, आकाशगंगाओं, सुपरनोवा विस्फोटों, क्षुद्रग्रहों से लेकर अंतरिक्ष मलबे तक सभी संभावित खगोलीय पिंडों का सर्वेक्षण करने में सक्षम होती हैं।