जलवायु परिवर्तन एवं मानवीय गतिविधियों के कारण दुनिया की सबसे बड़ी उष्णकटिबंधीय आर्द्रभूमि ‘पैंटानल’ पर लुप्त होने का खतरा है…
दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के मध्य में स्थित जैव विविधता से प्रचुर यह आर्द्रभूमि ब्राजील, पराग्वे और बोलीविया तीन देशों में विस्तृत है।
यहाँ पक्षियों की 580 से अधिक प्रजातियां, मछलियों की 271, स्तनधारियों की 174, सरीसृपों की 131 और उभयचरों की 57 प्रजातियां पायी जाती हैं।
अमेज़ॅन वर्षावन के विपरीत, पैंटानल में वनस्पति आग के साथ सह-अस्तित्व में विकसित हुई है और कई पौधों की प्रजातियों को गर्मी के लिये आग की आवश्यकता होती है।
ये प्राकृतिक आग शुष्क मौसम में बिजली गिरने के कारण लगती हैं, लेकिन आसपास के बाढ़ के मैदान उन्हें फैलने से रोकते हैं। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के कारण असामान्य रूप से शुष्क परिस्थितियों ने आग के जोखिम को बहुत अधिक बढ़ा दिया है।
इसके अलावा पर्यावरणीय दबाव, असंधारणीय बुनियादी ढांचे के विकास, अनुपचारित अपशिष्ट प्रदूषण आदि क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को अस्थिर करने के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहें हैं।
पैंटानल में वनों की कटाई में भी वृद्धि हुई है और 12% से अधिक वन आवरण पहले ही समाप्त हो चुके हैं। यदि इस आर्द्रभूमि के संरक्षण का कोई उपाय नहीं किया गया तो 2050 तक पैंटानल की मूल वनस्पतियां लुप्त हो जायेंगी।
