हाल ही में, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण से दक्षिणी दिल्ली में अवस्थित अनंगताल के जीर्णोद्धार करने का निर्देश दिया है। विदित है कि 1200 वर्ष पुरानी यह ऐतिहासिक झील सीवेज नालियों एवं अन्य अतिक्रमण के कारण लुप्तप्राय हो चुकी है।
इसे दिल्ली के संस्थापक तोमर शासक अनंग पाल द्वितीय ने 1052 में महरौली क्षेत्र के प्रसिद्ध 27 हिंदू-जैन मंदिरों के पीछे बनवाया था। यह झील जोग माया मंदिर के उत्तर में और कुतुब परिसर के उत्तर-पश्चिम में अवस्थित है।
अलाउद्दीन खिलजी ने 1296-1316 के दौरान कुतुबमीनार के निर्माण एवं कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के विस्तार में इस तालाब के जल का उपयोग किया था।
अनंग ताल का उत्खनन वर्ष 1993 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पुरातत्वविद् डॉ. बी. आर. मणि के नेतृत्व में किया गया था।
विदित है कि अनंगपाल ने दिल्ली को ढिल्लिकापुरी नाम दिया था, जिसकी जानकारी लॉर्ड कनिंघम द्वारा खोजे गए पत्थर के शिलालेखों से पता चलती है। ये शिलालेख पालम, नारायणा और सरबन (रायसीना) से मिले हैं।
