चर्चा में क्यों: हाल ही में, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी और गाजीपुर ज़िलों को पश्मीना ऊन का प्रसंस्करण करने और ऊनी कपड़ों को बुनने के लिए चयनित किया है।
इस कार्य हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा चार संस्थानों को चुना गया है-
- कृषक ग्रामोद्योग विकास संस्थान, वाराणसी
- श्री महादेव खादी ग्रामोद्योग संस्थान, गाजीपुर
- खादी कंबल उद्योग संस्थान, गाजीपुर
- ग्राम सेवा आश्रम, गाजीपुर
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बाहर पश्मीना बुनाई शिल्प की इस अनूठी कला से शेष भारत के कारीगरों को परिचित कराने का यह पहला प्रयास है।
पश्मीना ऊन को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में समुद्र तल से 15,000 फीट की ऊँचाई पर पाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की चांगथांगी बकरी से प्राप्त किया जाता है।
पश्मीना उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देकर लद्दाख के अलावा इन क्षेत्रों के स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का सृजन किया जा सकेगा। साथ ही, इस शिल्पकला को संरक्षित भी किया जा सकेगा।
