चर्चा में क्यों: हाल ही में, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मिशन ‘समुद्रयान’ को चेन्नई स्थित राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान से लॉन्च किया है। यह अभियान गहरे समुद्र में अन्वेषण और दुर्लभ खनिजों के खनन के लिए 6,000 करोड़ रूपये की परियोजना ‘डीपओशन मिशन’ का हिस्सा है।
यह अभियान समुद्र में 1,000 से 5,500 मीटर की गहराई में पाए जाने वाले पॉलिमेटेलिक मैंगनीज नोड्यूलस, गैस हाइड्रेट्स, हाइड्रो-थर्मल सल्फाइड्स और कोबाल्ट क्रस्ट जैसे संसाधनों के अन्वेषण में सुविधा प्रदान करेगा।
इस अभियान के लिए ‘मत्स्य 6000’ नामक मानवयुक्त पनडुब्बी तैयार की गई है, जो टाइटेनियम मिश्र धातु से निर्मित है और तीन व्यक्तियों को ले जाने में सक्षम है।
इसकी सामान्य परिचालन क्षमता 12 घंटे की होगी। आपातकालीन स्थिति में इसकी परिचालन क्षमता को 96 घंटे तक किया जा सकता है।
भारत, समुद्र के भीतर की ऐसी अनुसंधान गतिविधियों हेतु मानवयुक्त मिशन विकसित करने वाला संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस और चीन के पश्चात् छठा देश बन गया है।
विदित है कि समुद्र के भीतर अन्वेषण गतिविधियों के उद्देश्य से चीन द्वारा 2020 में मानवयुक्त पनडुब्बी फेंडोज़े का विकास किया गया, जिसने हाल ही में 11,000 मीटर की गहराई तक गोता लगाया था।