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आई.पी.सी.सी. रिपोर्ट और जलवायु परिवर्तन (IPCC Report and Climate Change)

forest fire

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हाल ही में, ‘जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल’ (IPCC) ने अपनी छठी आकलन रिपोर्ट का दूसरा भाग क्लाइमेट चेंज 2022: इंपैक्ट, एडप्टेशन और वल्नरबिलिटी (Climate Change 2022: Impacts, Adaptation and Vulnerability) को जारी किया है।

इस रिपोर्ट में पहली बार अनुकूलन समर्थन (Adaptation Support) के लिये ‘जलवायु न्याय’ (Climate Justice) और समानता (Equity) को प्रमुख तत्त्वों के रूप में मान्यता दी गई है।

वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव : रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

प्राकृतिक आपदाएँ:

इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के अधिक गंभीर एवं व्यापक होने की चेतावनी दी गई है। प्राणियों के साथ-साथ प्राकृतिक प्रणालियों (Natural Systems) का बढ़ते तापमान के प्रति अनुकूलन की क्षमता लगातार कम हो रही है।

कृषि संकट

जल संकट

स्वास्थ्य पर प्रभाव

भारत पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव : रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

कृषि उत्पादन में कमी

प्राकृतिक आपदाएँ

समुद्री जल स्तर में वृद्धि

वेट-बल्ब तापमान

वेट-बल्ब तापमान क्या है: वेट-बल्ब तापमान (Wet-bulb Temperature) का उपयोग गर्मी और आर्द्रता दोनों को मापने के लिये किया जाता है, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि वातावरण मनुष्यों के लिए अनुकूल है या नहीं। वेट-बल्ब तापमान की उच्चतम सीमा सामान्यतः 35 डिग्री सेल्सियस को मानी जाती है। ध्यातव्य है कि तापमान बढ़ने पर मानव शरीर पसीने से खुद को ठंडा कर लेता है लेकिन यदि तापमान और आर्द्रता बहुत अधिक है, तो पसीना शरीर का तापमान कम नहीं कर पाता है और शरीर के ताप का खतरनाक स्तर तक बढ़ने की जोखिम बढ़ जाता है।

आई.पी.सी.सी. रिपोर्ट के बारे में:

निष्कर्ष

आई.पी.सी.सी. ने अपनी रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का उल्लेख किया है। अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट में विश्व के देशों को यह चेतावनी दी है कि 2 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य का पीछा करना विनाशकारी एवं खतरनाक हो सकता है। इसके बजाए तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर बनाये रखने के लिये और अधिक सक्रिय कार्यवाही की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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