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हाई ब्लड प्रेशर और नमक: स्ट्रोक का छुपा कारण

अधिकांश भारतीय यह नहीं जानते कि वे कितना नमक खा रहे हैं, और यह स्ट्रोक का खतरा कैसे बढ़ाता है

नमक भारतीय भोजन का इतना स्वाभाविक हिस्सा बन चुका है कि उस पर सवाल उठाने की ज़रूरत ही महसूस नहीं होती। अचार, पापड़, नमकीन, चटनी, पैकेट वाले स्नैक्स, होटल का खाना और रोज़ की घरेलू रसोई, हर जगह नमक मौजूद है। नतीजा यह है कि अधिकांश भारतीय बिना महसूस किए ज़रूरत से कहीं ज़्यादा नमक खा रहे हैं, जबकि उन्हें खाना “ज़्यादा नमकीन” भी नहीं लगता।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति को दिन में 5 ग्राम से कम नमक (लगभग एक छोटी चम्मच) लेना चाहिए। लेकिन भारत में औसत नमक सेवन इससे लगभग दोगुना है।

यह अधिकता किसी एक भोजन से नहीं, बल्कि दिन भर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा जुड़ते जाने से होती है, नाश्ते के साथ नमकीन, दोपहर के खाने में सब्ज़ी-दाल, शाम की चाय के साथ स्नैक्स और रात के खाने में अचार या चटनी।

एक आम भ्रांति यह है कि समस्या सिर्फ “जंक फूड” में है। सच्चाई यह है कि कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ जैसे अचार, पापड़, चटनी और होटल-स्टाइल ग्रेवी नमक के बड़े स्रोत हैं।

अधिक नमक शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाता है, जिससे रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है और ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) बढ़ जाता है। समय के साथ यह दबाव मस्तिष्क तक जाने वाली धमनियों को नुकसान पहुँचाता है।

इसी कारण उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई रक्त वाहिका फट जाती है। अधिक नमक इन दोनों स्थितियों की संभावना बढ़ाता है।

सबसे खतरनाक बात यह है कि उच्च रक्तचाप अक्सर बिना किसी लक्षण के रहता है। व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करता है और अचानक स्ट्रोक हो जाता है।

भारत में स्ट्रोक की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है और कई मामलों में यह कम उम्र में ही सामने आ रही है। अधिक नमक सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, मधुमेह और मोटापा, ये सभी मिलकर इस खतरे को बढ़ाते हैं।

वैश्विक स्वास्थ्य आकलनों में बार-बार यह कहा गया है कि नमक की मात्रा कम करना हृदय रोग और स्ट्रोक को रोकने का सबसे किफ़ायती और प्रभावी उपाय है जिस पर WHO भी ज़ोर देता है।

इस कारण लोगों को लगता है कि वे सीमित नमक ले रहे हैं जबकि वास्तविकता इसके उलट होती है।

नमक पूरी तरह छोड़ना ज़रूरी नहीं है। थोड़ी-थोड़ी कटौती भी ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक के जोखिम को काफ़ी कम कर सकती है।

स्ट्रोक कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है, यह अक्सर सालों की चुपचाप हुई क्षति का परिणाम होता है। इस क्षति में अधिक नमक की बड़ी भूमिका होती है।

नमक कम करना स्वाद से समझौता नहीं है, बल्कि दिमाग, दिल और लंबे स्वस्थ जीवन की रक्षा है। जागरूकता पहला कदम हैऔर कई भारतीयों के लिए यही कदम जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

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