हाल ही में, केंद्रीय बजट में सिकल सेल एनीमिया को 2047 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
सिकल सेल एनीमिया, एक अनुवांशिक रक्त विकार है। इस रोग के साथ जन्मे बच्चों के मामले में भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है।
इस रोग में लाल रक्त कोशिकाएं अंग्रेजी वर्णमाला के C अक्षर के समान (सिकल/दरांती के आकार) हो जाती हैं। ये रक्त कोशिकाएं रक्त के प्रवाह को धीमा और अवरुद्ध कर देती हैं।
इसके अलावा, ये कोशिकाएं जल्दी नष्ट हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है जो शरीर में ऑक्सीजन की कमी कर देती हैं।
इन रुकावटों और कमी के कारण क्रोनिक एनीमिया, दर्द, थकान, एक्यूट चेस्ट सिंड्रोम, स्ट्रोक और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
इसका उपचार जीन थेरेपी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण से किया जा सकता है लेकिन ये दोनों उपचार महंगे और विकास के चरण में है।
वर्तमान में रक्त आधान (Blood transfusion) इस रोग का एक विश्वसनीय उपचार है। लेकिन रक्त दाताओं की कमी, संक्रमित रक्त और संक्रमण के खतरें इसकी प्रमुख चुनौतियां हैं।
इस रोग के बेहतर प्रबंधन और नियंत्रण के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कई आउटरीच कार्यक्रम चला रहे हैं। जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने एक पोर्टल भी लॉन्च किया है, जिसमें जनजातीय समूहों के लोग एससीए से संबंधित कोई लक्षण होने पर स्वयं को पंजीकृत कर सकते हैं।

