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संथाल जनजाति

grayscale photo of topless man sitting on ground

Photo by Balazs Simon on Pexels.com

संथाल जनजाति से आने वाली द्रौपदी मुर्मू ने भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनकर  इतिहास रच दिया है।

संथाली, भारत में तीसरा सबसे बड़ा अनुसूचित जनजाति समुदाय है जो ज्यादातर ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में निवास करते हैं।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (एससीएसटीआरटीआई), भुवनेश्वर के अनुसार, ‘संथाल’ शब्द दो शब्दों से बना है; ‘संथा’ का अर्थ है शांत और शांतिपूर्ण और ‘आला’ का अर्थ है मनुष्य।

कुछ दशक पूर्व तक खानाबदोश जनजाति के रूप में जाने जाने वाले संथाल, अब गोंड और भीलों के बाद भारत में तीसरा सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है एवं भारत की जनजातियों में सबसे अधिक साक्षरता दर है।

संथालों को 1855-56 की संथाल हुल (क्रांति) के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी से संघर्ष के लिये भी जाना जाता है जिसका नेतृत्व चार मुर्मू भाइयों (सिद्धू, कान्हू, चन्द और भैरव) ने किया था। । विदित है कि संथाल विद्रोह को स्वतंत्रता पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में सबसे असाधारण घटनाओं में से एक माना जाता है।

संथाल बहुदेववादी हैं जो कई देवताओं, पूर्वजों की आत्माओं की पूजा और उनका सम्मान करते हैं, इनके धर्म को ही सरना कहा जाता है, जिसका नाम पवित्र पेड़ों के नाम पर रखा गया है।

ये संथाली भाषा बोलते हैं, जो ऑस्ट्रो-एशियाई भाषा परिवार से संबंधित है। संथालों की अपनी लिपि ओलचिकी है, जिसे 1925 में डॉ रघुनाथ मुर्मू द्वारा विकसित किया गया था।

संथाल घरों को ‘ओलाह’ कहा जाता है जो दूर से ही पहचाने जा सकते हैं। ये घर बाहरी दीवारों पर बहुरंगी चित्रों के साथ बड़े, साफ-सुथरे और आकर्षक होते हैं। दीवार के निचले हिस्से को काली मिट्टी, बीच के हिस्से को सफेद और ऊपरी हिस्से को लाल रंग से रंगा जाता है।

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