हाल ही में यूएस लॉरेंस-बर्कले लैब के वैज्ञानिकों ने जीवाणुओं से एक ऐसे ईंधन का विकास किया है जो वर्तमान में उपयोग किये जाने वाले रॉकेट ईंधनों से भी अधिक ऊर्जामान रखता है।
सिमुलेशन के डेटा से पता चलता है कि इस ईंधन में ऊर्जा घनत्व मान 50 मेगाजूल (MJ) प्रति लीटर से अधिक है, जबकि पेट्रोल के लिए यह 32 एमजे और मिट्टी के तेल आधारित रॉकेट ईंधन, आरपी-1 के लिए 35 एमजे ही होता है।
इस ईंधन को स्ट्रेप्टोमाइसेस नामक जीवाणु द्वारा बनाया गया है जिसका उपयोग स्ट्रेप्टोमाइसिन सहित कई अन्य दवाएं बनाने के लिए किया जाता है।
वैज्ञानिकों ने पॉलीसाइक्लोप्रोपेनेटेड फैटी एसिड मिथाइल एस्टर से बने इस ईंधन को ‘पीओपी-फेम’ (POP-FAME) नाम दिया है जिसकी रासायनिक संरचना तीन-कार्बन वाले रिंग पर आधारित है।
वैज्ञानिकों ने जीवाणु में उन एंजाइमों के लिए जिम्मेदार जीन की पहचान की जो तीन-कार्बन के रिंग वाले अणु बना सकते हैं। इसके बाद जेनेटिक इंजीनियरिंग की सहायता से बैक्टीरिया को वांछित ईंधन के उत्पादन हेतु विकसित किया गया।
POP-FAME की आणविक संरचना सिंटिन (Syntin) से मिलती-जुलती है जो रूस द्वारा 1960 के दशक में विकसित एक राकेट ईंधन था। इसका उपयोग सोयुज रॉकेटों को लॉन्च करने में किया गया था।

