चर्चा में क्यों : हाल ही में ब्रिटेन के अलावा मंकीपॉक्स वायरस के मामले कनाडा और स्पेन समेत 12 से अधिक देशों में पाए जा चुके हैं।
मंकीपॉक्स के बारे में :
मंकीपॉक्स, वायरस के कारण होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है, जो चेचक की तरह लक्षणों को प्रदर्शित करती है।
मंकीपॉक्स के लिए जिम्मेदार वायरस बंदरों और अन्य जंगली जानवरों में पाया जाता है।
यह एक ऑर्थोपॉक्सवायरस है, जो वायरस का एक जीनस (समूह) है जिसमें ‘वेरियोला वायरस’ भी है, जिसकी वजह से चेचक होता है।
विदित है कि इसी जीनस के ‘वैक्सीनिया वायरस’ का इस्तेमाल चेचक के टीके में किया गया था।
लक्षण :
मंकी पॉक्स के लक्षण संक्रमण के 5वें दिन से 21वें दिन तक आ सकते हैं। इससे संक्रमित मरीजों में बुखार, शरीर दर्द और थकान के लक्षण देखे गए हैं। कुछ मामलों में मरीजों के चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर चकत्ते व दाने भी निकल आते हैं।
अन्य तथ्य :
मध्य और पश्चिम अफ्रीका के दूरदराज के हिस्सों में होने वाला यह वायरस पहली बार 1958 में बंदरों में पाया गया था। इंसानों में पहली बार यह मामला 1970 में दर्ज किया गया था।
मंकीपॉक्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए टीकाकरण का आकलन करने के लिए अनुसंधान हो रहे हैं। हालांकि, चेचक के टीके वायरस के प्रसार को रोकने में प्रभावी साबित हुए हैं।
निदान :
मंकीपॉक्स के लिए वर्तमान में कोई 100 प्रतिशत प्रमाणित और सुरक्षित इलाज नहीं है लेकिन इसके टीके और उपचार उपलब्ध हैं।
मंकीपॉक्स वायरस चेचक का कारण बनने वाले वायरस से काफ़ी मिलता-जुलता है इसलिए चेचक के टीके को भी दोनों रोगों के लिए प्रभावी माना गया है।

