हाल ही में, रेलवे द्वारा ट्रेनों की टक्कर को रोकने वाली स्वदेश में विकसित प्रणाली ‘कवच’ का सफल परीक्षण किया गया। यह परीक्षण दक्षिण मध्य रेलवे के सिकंदराबाद मंडल के लिंगमपल्ली-विकाराबाद खंड पर गुल्लागुडा और चिटगिड्डा रेलवे स्टेशनों के बीच किया गया…
- इस प्रणाली को लखनऊ स्थित अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने निजी कंपनियों के साथ मिलकर विकसित किया है। बजट प्रस्तावों के अनुसार 2022-23 में इस प्रणाली को 2,000 किलोमीटर पर शुरू करने की योजना है।
- यह लोकोमोटिव में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक और रेडियो फ्रीक्वेंसी उपकरणों का एक सेट है, जो सिग्नलिंग सिस्टम के साथ-साथ पटरियों में भी लगा होता है, यह प्रणाली ट्रेनों के ब्रेक को नियंत्रित करने के लिए अल्ट्रा हाई रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग करती है।
- इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि मानवीय त्रुटि के कारण दो ट्रेनों के एक ही लाइन पर आ जाने या फिर लाल सिग्नल के पार करने की दशा में यह प्रणाली स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर आमने-सामने या पीछे से होने वाली टक्कर से बचाती है।
- ये उपकरण लगातार लोकोमोटिव के आगे संकेतों को रिले करते हैं, जिससे यह कम दृश्यता के दौरान भी लोको पायलटों के लिए ट्रेन संचालन में सहायक होता है।
- कवच में भारत के स्वदेशी एंटी कॉलिजन डिवाइस और विदेशों में पहले से सफलतापूर्वक उपयोग किये जा रहे यूरोपीय ट्रेन सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली के प्रमुख तत्त्वों को शामिल किया गया है जो स्तर-4 (Level-4) नामक उच्चतम स्तर के सुरक्षा मानकों के अनुरूप है।

