रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के वैज्ञानिकों ने देश में पहली बार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और विंध्याचल के बीच 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन लिंक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है।
- इस तकनीक का प्रदर्शन प्रयागराज और विंध्याचल के बीच पहले से ही उपलब्ध ऑप्टिकल फाइबर लाइन पर किया गया है।
- विदित है कि क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन तकनीक क्यूबिट पर आधारित हैं और क्लासिकल भौतिकी में उपयोग किये जाने वाले बिट (0, 1) से अलग होते हैं।
- इनके मान किसी निश्चित समय पर परमाणु या फोटोन की स्थिति के प्रायिकता द्वारा निर्धारित होने के कारण यह एक साथ 0 और 1 दोनों मान को धारण कर सकते हैं।
- इस तकनीक पर आधारित ट्रांसमिशन को अगर कोई अवैध रूप से पढ़ने की कोशिश करता है तो इससे परमाणु या फोटोन की स्थिति प्रभावित होती है जिससे क्यूबिट के मान बदल जाते हैं। परिणामस्वरूप ट्रांसमिशन में एरर (त्रुटि) पैदा हो जाती है और दूसरे छोर पर मौजूद वैध प्राप्तकर्ता को इसका तुरंत पता चल जाता है।
- क्वाण्टम कुंजी वितरण (क्यू.के.डी.) प्रौद्योगिकी में क्वाण्टम भौतिकी के सिद्धांतों के जरिये डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, जोकि पारंपरिक गणितीय एल्गोरिदम वाली एन्क्रिप्शन प्रणालियों के साथ संभव नहीं है।

