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समुद्री शैवाल (Seaweed)

seaweed growing on bottom of sea

seaweed

चर्चा में क्यों: हालिया दिनों में तमिलनाडु के रामेश्वरमकी ग्रामीण जनसंख्या को समुद्री शैवाल की खेती और प्रसंस्करणके माध्यम से सशक्त बनाया जा रहा है।

इस क्षेत्र में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थानद्वारा समुद्री शैवाल की खेती के लिये प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

समुद्री शैवाल स्थूलदर्शीय अर्थात सहजता से दिखने वाले (मैक्रोस्कोपिक) ऐसे शैवाल हैं जिन्हें रेचक (Laxatives) के रूप में उपयोग करने के कारण ’21वीं सदी का चिकित्सा भोजन’ भी कहा जाता है।

इसका उपयोग घेघा रोग (गोइटर), कैंसर, हड्डी-प्रतिस्थापन चिकित्सा और हृदय एवं रक्तवाहिकाओं की शल्य चिकित्सा के लिए औषधीय कैप्सूल बनाने में किया जाता है

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