चर्चा में क्यों: हाल ही में, भारतीय वन्यजीव संरक्षण सोसायटी (डब्ल्यूपीएसआई) के एक अध्ययन के अनुसार, 2009 से 2019 के बीच, भारत में भालू के अंगों के अवैध शिकार और जब्ती के 149 मामले दर्ज किये गए हैं, जिसमें कम से कम कुल 264 भालूओं का शिकार किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, एशियाटिक ब्लैक बियर (Asiatic Black Bear) के पित्ताशय का पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग करने हेतु अवैध शिकार किया गया, जबकि स्लॉथ बियर (Sloth Bear) का शिकार उनकी त्वचा और पंजों के लिए किया गया।
विदित है कि भारत में भालू की चार प्रजातियाँ पाई जाती है, जिनमें एशियाटिक ब्लैक बियर और स्लॉथ बियर के अतिरिक्त हिमालयन ब्राउन बियर और सन बियर शामिल हैं। सन बियर मुख्यतया भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में पाए जाते हैं, जो विश्वभर में पाई जाने वाली भालू की आठ प्रजातियों में सबसे छोटी है।
भालू की इन सभी प्रजातियों को भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I तथा लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (Convention on International Trade in Endangered Species-CITES) के परिशिष्ट I के तहत संरक्षित किया गया है।
आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची में एशियाटिक ब्लैक बियर, स्लॉथ बियर एवं सन बियर को सुभेद्य श्रेणी (Vulnerable) में सूचीबद्ध किया गया है। जबकि हिमालयन ब्राउन बियर को लीस्ट कंसर्न श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।

