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वैश्विक मीथेन संकल्प (Global Methane Pledge)

grayscale photography of locomotive train beside factory

Photo by Frans Van Heerden on Pexels.com

चर्चा में क्यों: हाल ही में, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के 26वें शिखर सम्मेलन (COP-26) का आयोजन ग्लासगो में किया गया, जहाँ वैश्विक मीथेन संकल्प (Global Methane Pledge) को लॉन्च किया गया है।

यह संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के संयुक्त नेतृत्व में किया गया एक प्रयास है, जिसकी पहली बार घोषणा सितंबर 2021 में की गई थी। इस संकल्प पर 100  से अधिक देशों द्वारा हस्ताक्षर किया जा चुका है।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक मीथेन उत्सर्जन को 2020 के स्तर से 30 प्रतिशत तक कम करना है।

भारत, मीथेन का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है, लेकिन इस संकल्प का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व-औद्योगिक युग के बाद से वैश्विक औसत तापमान में 1.0 डिग्री सेल्सियस की शुद्ध वृद्धि में मीथेन का योगदान लगभग 50 प्रतिशत है।

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