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बन्नी भैंस (Banni Buffalo)

चर्चा में क्यों: कृत्रिम गर्भाधान के आईवीएफ (In Vitro Fertilization) तकनीक से किये गये गर्भाधान के जरिये हाल ही में भारत में पहली बार भैंस के एक बछड़े का जन्म हुआ है।

यह भैंस बन्नी नस्ल की है, जिसका गर्भाधान गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले के धनेज गांव में हुआ है। बन्नी भैंस का अन्य प्रचलित नाम कछी और कुण्डीभी है।

बन्नी भैंस मुख्य रूप से गुजरात के कच्छ क्षेत्र में पाई जाती हैं, जो बन्नी घास के मैदान की स्थानिक प्रजाति है। इस क्षेत्र में आदिवासी चरवाहा समुदाय ‘मालधारी’ का मुख्य रूप से निवास है, जो इस भैंस का पशुपालन करते हैं।

गुजरात में बन्नी भैंस का निवास स्थान

यह भैंस शुष्क वातावरण में अपने अनुकूलन और उच्च दूध उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती है जो प्रतिदिन 12-18 लीटर तक दूध देती हैं। ये रात्रि में बन्नी घास मैदानों में चरने तथा सुबह दूध निकालने के समय वापस गाँव में स्वयं लौट आने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होती हैं।

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